सूक्ष्म से अनंत की यात्रा

सृष्टि में जीवन की यात्रा ही सूक्ष्म रूप से ही शुरू होती है, कुछ जीव सूक्ष्म रूप में ही रहते हैं और कुछ विशाल शरीर के लेकिन जीवन की निरंतरता को सभी बना कर रखते हैं,जीवन की विशालता मे सूक्ष्मता निहित है सूक्ष्मता के बिना विशालता संभव नहीं है फिर विशालता का अहंकार क्यों,विशाल मे नहीं सूक्ष्म मे ही सारी...

मूल अधिकारों को रौंदती सरकारें ।

लोकतंत्र में सरकारे जनता के द्वारा चुनी जाती है ,ऐसी व्यवस्था मे जनता सर्वोच्च स्थान पर होती है , सही सरकारो को चुनना हमारी पहली प्राथमिकता होती है जिसे हम सबसे गैर जिम्मेदार तरीक़े से करते हैं । कोइ नृप होइ हमय का हानी, इस आशय से हम वोट देते हैं तो चेरी छोड़ न होबै रानी का लक्ष्य सरकार...

धर्म का छोला ओढ़ती बुराइयाँँ

समस्याएँ यदि व्यक्तिगत हों तो उसका इलाज संभव है, यदि वे सामाजिक हो गई तो कुरीति बन जाती हैं इनका इलाज कठिन हो जाता है, यदि कुरीतियों ने धर्म का चोला ओढ़ तो इनका इलाज बहुत मँहगा हो जाता है, कभी कभी तो मानवता पर ही संकट बन जाता है। धर्मो का एक मात्र उद्देश्य है प्रकृति का संरक्षण एवं...

भीड़ का भेड़तंत्र

कभी मराठा आरक्षण ,कभी जाट आंदोलन कभी कभी छोटी छोटी समस्याओं को लेकर देश में तरह तरह के आंदोलन , हड़ताल होती रहती है। जिसमें से आज के समय में कुछ आंदोलन तो हिंसक रूप ले लेते हैं। आम जन की समस्या तो दूर , अब आतंकी संगठन ,नक्सली संगठन भी बंद का आवाहन करने लगे हैं और उन्हें कुछ...

सरकारों की जवाबदेही जनता के प्रति या जनप्रतिनिधियों के ?

सरकारों के द्वारा लिए गये निर्णय यदि देश एवं जनता के हित मेंं नहीं तो उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए । सरकारों की जवाबदेही उसे चुनने वाली जनता के प्रति होनी चाहिए न कि जनप्रतिनिधियों के प्रति । सरकार ने जनवरी 2004 के बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को इस आशय...