भीड़ का भेड़तंत्र[ Crowd in India ]

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कभी मराठा आरक्षण ,कभी जाट आंदोलन कभी कभी छोटी छोटी समस्याओं को लेकर देश में तरह तरह के आंदोलन , हड़ताल होती रहती है। जिसमें से आज के समय में कुछ आंदोलन तो हिंसक रूप ले लेते हैं। आम जन की समस्या तो दूर , अब आतंकी संगठन ,नक्सली संगठन भी बंद का आवाहन करने लगे हैं और उन्हें कुछ तथाकथित प्रबुद्ध जनों का समर्थन भी मिल जाता है। जो इसे हिंसक और उग्र बनाने में उत्प्रेरक का काम करते हैं। समूह की नाजा़यज माँगो पर बेवजह अपनी मुहर लगाते हैं।

समाचार चैनलों में तीतर की तरह इन्हें लड़ते देख अनुमान लगाया जा सकता है कि ये समाज और देश को किस दिशा मैं ले जायेगें।

भीड़ के दो स्पष्ट घटक होते हैं । भीड़ में मौजूद व्यक्ति का अपना कोई स्वतंत्र विचार अस्तित्व में नहीं आता है।

वे सामूहिक विचार से संचालित होते हैं। ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक होती है जो बिना विचारे भेडो़ं की तरह जिन्दाबाद, मुर्दाबाद के नारे लगाते रहते हैं, आमतोर पर पटरी उखाड़ने, बस फूंकने तथा देश विरोधी सभी अराजक काम यही करते हैं।

दूसरे वे लोग होते हैं जो भीड़ के लिए मस्तिष्क का कार्य करते हैं। ये बडी़ चालाकी से जनता को बेवकूफ बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं और पुलिस की लाठी से अपनी पीठ बचाकर रखते हैं। ये भीड़ की भेडो़ंं को हाँकने का काम करते हैं।

अपना देश बडी़ कडी़ एवं सघन आबादी वाला देश है। हर जगह भीड़तंत्र है। कभी कभी तो भीड़ को यह भी नहीं पता होता की वे इकट्ठा क्यों हुए हैं। एक बार बाजार मेंं चाय की दुकान पर किसी बात पर दो पक्षों में कहा सुनी हो गयी , सौ से भी अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गयी मैं भी  उत्सुकता के कारण वहाँँ पहुँँच गया पूछा कि क्या बात है, उत्तर मिला -पता नहीं भीड़ मेंं हम भी यहाँँ खडे़ हो गये। सब अजनबी जिज्ञासा लेकर भीड़ का अंग बनते चले गये। ये है भीड़ का समाज शास्त्र जहाँ भीड़ है — समाज नहीं — सोच नहीं बस भीड़ की भेडे़ं हैं जिसे जो चाहे जिधर हाँक दे। 

अब सोचना जनता को है कि वे जिस भीड़ तंत्र का हिस्सा बनकर देश का नुकसान कर रही है उससे देश का, समाज का, या स्वयं उसका कितना लाभ होने वाला है। इसका आकलन करके ही भीड़ का हिस्सा बनें अन्यथा आप स्वयं भी उसी ड़ाल को काट रहे हैं जिस पर आप बैठे हैं।

ये लेखक के अपने विचार हैं।

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Vijaypal Mishra

Spend 20 years of my life observing politics , society in India. Political and social enthusiast. Also trained in Yoga and meditation in Haridwar, Uttarakhand.

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