Hardik Pandya controversy in Hindi. हार्दिक पंड्या की विवादित टिप्पणि ।

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 Hardik Pandya in Hindi

हार्दिक पंड्या की विवादित टिप्पणी आजकल हर न्यूज चैनल पर छाई हुई है। सब अपने तरीके से इसका आंकलन करने मे लगे। कई लोग हार्दिक पंड्या को गलत मान भी चुके हैं।

हमारी विचारधारा अलग है, आप अगर यहाँ तक आ ही गये हैं तो हमारी भी सुन लीजिए..जिसके लिए थोड़ा पीछे चलने पड़ेगा आपको; शो के पुराने एपिसोड्स…

  • करण जौहर पूछता है के ऐसा अक्षय कुमार में क्या है जो खान (आमिर /शाहरुख/सलमान) में नहीं है। ट्विंकल खन्ना जवाब देती हैं : Some extra inches
  • दीपिका पादुकोण कहती हैं के रणवीर कपूर को कोंडोम्स ( निरोध) के किसी ब्रैंड की मशहूरी करनी चाहिये।

विस्तरित रूप से लिखने लगूं तो ऐसे ना जाने कितने संवाद हैं जो “कॉफी विद करण” में हुये और जो “आपत्तिजनक” कहे जा सकते हैं।


अब मुद्दे की बात पर आते हैं।

  • क्या दीपिका पादुकोण को उनकी टिप्पणी के पश्चात बॉलीवुड से निकाल दिया गया?
  • क्या उन्हें फिल्में मिलनी बंद हो गयी?
  • उस वक़्त किसी ने युवाओं के सोच का आकलन क्यों नहीं किया?

दीपिका ही क्यों रणवीर सिंह से लेकर वेटरन एक्टर्स कहे जाने वाले शाहरुख /आमिर / अक्षय कुमार आदि ने ऐसी कई बातें कही जिन्हें “आपत्तिजनक” की श्रेणी में रखा जा सकता है। दर्शकों ने भी खूब चटखारे ले ले कर सुना। विवाद की तो बात छोड़िये कई बार तो फिल्मी सितारों को उनके बेबाक अंदाज़ के लिये तारीफ भी मिली।

यह मेरी समझ से बाहर है के के एल राहुल और हार्दिक पांड्या ने क्या गुनाह कर दिया?

करण जौहर ने एक सवाल किया।

सवाल के जवाब में हार्दिक पंड्या ने जवाब दिया जिसे “सेक्सिस्ट” करार देते हुये दोनों को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

जवाब देने वाले टीम से बाहर हैं और सवाल पूछने वाला प्रधानमंत्री के साथ फोटू खिंचवा रहा है।

मैं इन बात का आंकलन नहीं करना चाहता के हार्दिक पंड्या और राहुल ने सही कहा या गलत?

इस बात का विश्लेषण करने के लिये सब स्वतंत्र हैं।

परंतु एक टीवी शो पर किसी सवाल के जवाब में उन्होंने जो भी कहा उससे उनके क्रिकेट का क्या लेना देना है?

और सबसे बड़ी बात तलवार अकेले के एल राहुल और हार्दिक पांड्या पर चली है। एक टीवी शो में संवाद हो रहा था। खिलाड़ी तो एक ओर बैठे थे। दूजी ओर बैठे करण जौहर पर तो किसी ने सवालिया निशान नहीं उठाये। किसी ने नहीं पूछा के नेशनल टेलविजिन पर प्रसारित होने वाले शो पर ऐसे आपत्तिजनक सवाल क्यों किये गये। कोरा पर भी किसीने करण जौहर पर सवालिया निशाना नहीं साधा।

या फिर बीसीसीआई को ओर से भी कोई स्टेटमेंट नहीं आया के इस बकवास शो में आगे से किसी क्रिकेटर को नहीं भेजा जायेगा।

मैं क्रिकेटप्रेमी नहीं हूं। परंतु एक खेलप्रेमी होने के नाते मैं खिलाड़ी को केवल उसके खेल से आंकता हूँ। कोई कहा कहता है क्या करता है , एक के साथ सोता है या हर रात एक के साथ सोता है यह उसकी निजी जिंदगी है। वह अपने भले बुरे का खुद मालिक है। वह क्या सोचता है क्या कहता है इससे क्या सरोकार है।

हर एक का निजी जीवन है। व्यक्तिगत खयालात हैं। सोचने समझने का अपना ढंग है। सही गलत पहचानने की अपनी अपनी मानसिकता है।

परंतु एक टीवी शो पर कही गयी किसी बात से क्रिकेट का क्या लेना देना है?

असल में कुछ पेशे ऐसे बन चुके हैं जहां चरित्रवान दिखना अनिवार्य हो चुका है। निजी जीवन में कौन क्या है इसका मूल्यांकन छोड़ कर खिलाड़ी की परफॉर्मेंस पर ध्यान केंद्रित करें तो बेहतर होगा।

के एल राहुल और हार्दिक पांड्या ने जो भी कहा वह उनके निजी विचार थे। परंतु विचारों की आलोचना के लिये क्रिकेट टीम से बाहर का रास्ता दिखाना कहाँ तक जायज़ है। संवाद भी ऐसे कार्यक्रम में किया गया जहां एक से एक विवादास्पद और आपत्तिजनक बातें कही जा चुकी हैं।

हैरानी तो यह देख कर हो रही है के सवाल पूछने वाला प्रधानमंत्री के साथ फोटू खिंचवा रहा है और जवाब देने वाले दो प्रतिभावान खिलाड़ी टीम से बाहर होकर ड्रेसिंग रूम में मक्खियां मार रहे हैं।

क्या दोगलापन है। बीसीसीआई में दम है तो खिलाड़ियों पर कार्यवाही करने से पहले ग** के शो को बंद करवाने की मुहिम चलाती जहां वह शब्द कहे गये जो उन्हें “सेक्सिस्ट” लगे।

इसी शो में कोई फिल्मी सितारा कुछ भी विवादास्पद कह जाये तो कहा जाता है के वह “बेबाक” है और कोई खिलाड़ी अगर कुछ कह जाये तो वह चरित्रहीन करार दिया जाता है और उसे टीम से बाहर निकाल दिया जाता है।

मज़े की बात है के इस सारे प्रकरण में दोषी जवाब देने वाले बनते हैं जबकि आपत्तिजनक सवाल पूछने वाले होस्ट पर कोई सवालिया निशान नहीं लगाता। खिलाड़ियों के माफी मांगने के पश्चात भी उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है और “कॉफी विद करण” का प्रसारण नेशनल टेलीविजन पर बदस्तूर जारी रहता है।

धन्यवाद

ये लेखक के अपने विचार हैं।

Writer and Author:

©Gaurav Kumar Tiwari

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Vijaypal Mishra

Spend 20 years of my life observing politics , society in India. Political and social enthusiast. Also trained in Yoga and meditation in Haridwar, Uttarakhand.

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