Honest politician .सबसे ईमानदार नेता कौन है ?

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जो मेरा मानना है, वो शायद आप नहीं मानेंगे..और जो आपका मानना है वो शायद मुझे ठीक न लगे।

बात 2013 की है, जब कांग्रेस का शासन था।

उस वक़्त मुझे राजनीति में अलग ही रुचि होने लगी थी, हर वक़्त टेलीविजन पर किसी न किसी के बारे में सुनता रहता था..

उस वक़्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का मैं बहुत बड़ा प्रशंसक था। वे मुझे सबसे ईमानदार नेता लगते थे । अपको भी याद होगा, उन्होंने वादा पूर्ण न कर पाने की वजह से जब 49 दिनों में इस्तीफ़ा दे दिया था…वाह क्या नेता मिला था भारत को… इस वजह से मेरे दिल मे उनके प्रति इज़्ज़त और भी बढ़ गयी थी। सबसे ईमानदार नेता

 Honest politician .

एक और नाम था जो शायद मोदीजी और केजरीवाल जी जैसा विख्यात नहीं था उस वक़्त… श्री मनोहर पर्रिकर जी..

 Honest politician .

चलिए उनके बारे मे थोड़ा बहुत जाने।

बचपन से ही उन के मन पर RSS के संस्कार पड़े। पर्रीकर का चयन IIT मुम्बई में हुआ, और वहीं से उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।

IIT पास करके मनोहर जी वापस गोवा आए, एक छोटा सा उद्योग आरम्भ किया और साथ ही संघ का कार्य भी देखते रहे। उन दिनों गोवा में भाजपा का नामोनिशान तक नहीं था। सिर्फ दो अर्थात, काँग्रेस और गोमांतक पार्टी की जनता पर पकड़ थी। ऐसी परिस्थिति में संघ के कार्यकर्ताओं के सहारे पर्रीकर ने लक्ष्मीकांत और श्रीपाद नाईक जैसे युवाओं के साथ मिलकर सिर्फ पन्द्रह वर्षों में भाजपा को सत्ता की सीढ़ी तक पहुँचा दिया।

मानिये ना मानिये, इन्होंने जब खुद के दम पर गोआ में 2012 चुनाव जीता था, हम मोदी लहर से उतना वाकिफ नहीं थे तब।

अरविंद केजरीवाल और मनोहर पर्रिकर के भाषण को अक्सर यूट्यूब पर सुनता रहता था। ये बता दूं कि उस वक़्त जिओ नहीं था, तो 149 रुपये में अनलिमिटेड प्लान से साथ एयरसेल में ही रिचार्ज कराता था।

समय बीतता गया और साथ ही नेताओं के प्रति मेरी राय भी बदलती गयी, ठीक दिल्ली के मुख्यमंत्री भी मेरे पसंदीदा नेता नहीं थे।

नहीं बदला तो बस एक नाम, मनोहर पर्रिकर।

जब बीजेपी 2014 जीत चुकी थी, तो सभी के ज़ुबान पर मोदी-मोदी था, उस वक़्त भी मनोहर जी मेरे पसंदीदा थे।

बहुत हो गयी मेरी फ़िज़ूल की बातें…आईये उनकी जिंदगी के कुछ विख्यात घटनाएं.

उनकी ईमानदारी का एक किस्सा IIT के दिनों का है, कि एक बार सुबह चार बजे पर्रीकर अपने मित्र के साथ कल्याण से दादर स्टेशन जाने के लिए स्टेशन पहुँचे, लेकिन टिकिट खिड़की का कर्मचारी गहरी नींद में था। उसे उठाने का काफी प्रयास किया परन्तु अंततः उन्हें बिना टिकट दादर जाना पड़ा। दादर में टिकट चेकर ने दोनों को पकड़ लिया और पर्रीकर से बीस पैसे टिकट के और चालीस पैसे दण्ड के अर्थात साठ पैसे वसूल किए। पर्रीकर को बहुत क्रोध आया, वे तो टिकट लेना चाहते थे, शासकीय कर्मचारी की गलती थी। उनकी कोई गलती नहीं होते हुए भी उन्हें दण्ड भरना पड़ा था इस कारण उन्होंने निश्चय किया कि बदले में वे भी सरकार का नुक्सान करेंगे। अगले बारह-पन्द्रह दिन तक लगातार वे बिना टिकट दादर गए। अचानक उन्होंने हिसाब लगाया तो पाया कि उन्होंने सरकार को दो रूपए ज्यादा का चूना लगा दिया है। मन ही मन उन्हें अपराधी भावना होने लगी। वे तुरंत पोस्ट ऑफिस गए और दो रूपए का डाक टिकट खरीदा और फाड़कर फेंक दिया। तब उन्हें यह समाधान हुआ कि अब सरकार से उनका “हिसाब बराबर” हुआ है। एक मुख्यमंत्री के रूप में भी पर्रीकर हमेशा अपने नियमों, अनुशासन एवं ईमानदारी के प्रति एकनिष्ठ बने रहे हैं।

सादगी और ईमानदारी का ढोंग करने वाले कई नेता भारत ने देखे हैं, परन्तु यह गुण पर्रीकर के खून में ही है, उसमें रत्ती भर का भी ढोंग या पाखण्ड नहीं है। गोवा में ऐसे कई लोग मिलेंगे जिन्होंने अनेक बार सुबह छः बजे किसी ठेले पर चाय पीते अथवा रात ग्यारह बजे किसी सामान्य से रेस्टोरेंट में अकेले खड़े नाश्ता करते हुए मनोहर पर्रीकर को देखा है। मुख्यमंत्री रहते हुए भी पर्रीकर कभी भी शासकीय आवास में नहीं रहे, और शासकीय गाड़ी का उपयोग भी आवश्यकता होने पर ही करते रहे। वे अपने बड़े बेटे के साथ 2BHK के उस फ़्लैट में रहते थे, जिसकी EMI वे 2017 तक भरते रहे।

उनके नेतृत्व में गोवा के प्रशासन से भ्रष्टाचार बहुत-बहुत कम हुआ है। गोवा की छोटी-छोटी गलियों में भी साफ़-सुथरे और चमकदार रास्ते और बिजली की स्थिति देखकर भरोसा कायम होता है।

अलग-अलग तरीकों से मनोहर पर्रीकर को रिश्वत देने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन उनका कठोर व्यक्तित्त्व और स्पष्ट वक्ता व्यवहार के कारण उद्योगपति इसमें सफल नहीं हो पाते थे और पर्रीकर के साथ जनता थी, इसलिए उन्हें कभी झुकने की जरूरत भी महसूस नहीं हुई। एक बार पर्रीकर के छोटे पुत्र को ह्रदय संबंधी तकलीफ हुई। डॉक्टरों के अनुसार जान बचाने के लिए तत्काल मुम्बई ले जाना आवश्यक था। उस समय गोवा का एक उद्योगपति उन्हें विमान से मुम्बई ले गया। चूँकि पर्रीकर के बेटे को स्ट्रेचर पर ले जाना था, इसलिए विमान की छह सीटें हटाकर जगह बनाई गई और उसका पैसा भी उस उद्योगपति ने ही भरा। पर्रीकर के बेटे की जान बच गई। उस उद्योगपति के मांडवी नदी में अनेक कैसीनो हैं और उसमें उसने अवैध निर्माण कर रखे थे। बेटे की इस घटना से पहले ही पर्रीकर ने उसके अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश जारी किए हुए थे। उस उद्योगपति ने सोचा कि उसने पर्रीकर के बेटे की जान बचाई है, इसलिए शायद पर्रीकर वह आदेश रद्द कर देंगे। काँग्रेस को भी इस बात की भनक लग गई और वह मौका ताड़ने लगी, कि शायद अब पर्रीकर जाल में फंसें। लेकिन हुआ उल्टा ही,। पर्रीकर ने उस उद्योगपति से स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि एक पिता होने के नाते मैं आपका आजन्म आभारी रहूँगा, परन्तु एक मुख्यमंत्री के रूप में अपना निर्णय नहीं बदलूँगा। उसी शाम उन्होंने उस उद्योगपति के सभी अवैध निर्माण कार्य गिरवा दिए और विमान की छः सीटों का पैसा उसके खाते में पहुँचा दिया। पढ़ने में भले ही यह सब फ़िल्मी टाईप का लगता है, परन्तु जो लोग पर्रीकर को नज़दीक से जानते हैं, उन्हें पता है कि पर्रीकर के ऐसे कई कार्य मशहूर हैं। चूँकि भारत की मीडिया गुडगाँव और नोएडा की अधिकतम सीमा तक ही सीमित रहती है और टेबल पर बैठकर “दल्लात्मक” रिपोर्टिंग करती है, इसलिए पर्रीकर के बारे में यह बातें अधिक लोग जानते नहीं हैं।

और यही वजह भी है 2017 गोआ चुनाव का जिसमे की बीजेपी सरकार बनाने के लिए कुछ सीटें कम हो रही थी, तो गोमांतक पार्टी ने कहा कि हम बीजपी को सपोर्ट तभी करेंगे जब आप मनोहर जी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनेंगे। और पर्रिकर जी ने रक्षा मंत्रालय छोड़ गोआ में मुख्यमंत्री का शपथ लिया।

मनोहर पर्रिकर की बिगड़ती सेहत पर विपक्ष लगातार तंज कस रहा है। पर्रिकर की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष लगातार कयास लगा रहा था।

मुख्यमंत्री बीमार होने के बावजूद काम कर रहे हैं और वो गोवा में अच्छी सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 Manohar Parikar

सत्ता हाथ में आते ही कितने नेता बदल जाते हैं, पर अब भी पर्रिकर जी की छवि सादगी से भरपूर सबसे ईमानदार नेता की ही है।

ये लेखक के अपने विचार हैं।

WRITER and AUTHOR:

©Gaurav Kumar Tiwari

About: Writes frankly on various serious issues. Writes in hindi . Loves hindi very much.

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Vijaypal Mishra

Spend 20 years of my life observing politics , society in India. Political and social enthusiast. Also trained in Yoga and meditation in Haridwar, Uttarakhand.

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