Nanaji Deshmukh in hindi . नानाजी देशमुख

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भारतरत्न ,राष्ट्र -महर्षि नानाजी देशमुख एक समाज सेवी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अति पुराने ,अनुभवी प्रचारक थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के ५०० से अधिक गावो में जाकर सामाजिक पुनर्गठन का सेवाकार्य किया था !

इसके अलावा ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अनुभवी और काफी पुराने सदस्य थे , श्यामा प्रसाद मुख़र्जी , बाजपेयी जी के साथ मिलाकर जन -संघ की स्थापना की थी और भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक थे !

इनका जन्म ११ ,अक्टूबर १९१६ में हुआ था।

नानाजी का जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में ब्राह्मण परिवार में हुवा था। नानाजी का लंबा और घटनापूर्ण जीवन अभाव और संघर्षों में बीता. उन्होंने छोटी उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया। मामा ने उनका लालन-पालन किया। बचपन अभावों में बीता। उनके पास शुल्क देने और पुस्तकें खरीदने तक के लिये पैसे नहीं थे किन्तु उनके अन्दर शिक्षा और ज्ञानप्राप्ति की उत्कट अभिलाषा थी। अत: इस कार्य के लिये उन्होने सब्जी बेचकर पैसे जुटाये।

वे मन्दिरों में रहे और पिलानी के बिरला इंस्टीट्यूट से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्नीस सौ तीस के दशक में वे आरएसएस में शामिल हो गये। भले ही उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र राजस्थान और उत्तरप्रदेश ही रहा। उनकी श्रद्धा देखकर आर.एस.एस. सरसंघचालक श्री गुरू जी ने उन्हें प्रचारक के रूप में गोरखपुर भेजा। बाद में उन्हें बड़ा दायित्व सौंपा गया और वे उत्तरप्रदेश के प्रान्त प्रचारक बने।

इन्होने आचार्य विनोबा भावे द्वारा संचालित भूदान आंदोलन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ! जयप्रकाश नारायण जी के “ Total -Revolution” के समय भी मुख्य भूमिका निभाने वालो में नानाजी थे !

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय सवयंसेवक संघ का प्रसार करने का श्रेय भी इन्हे दिया जाता है !

मात्र तीन वर्षो में इन्होने २५० से ज्यादा शाखाये शुरू करवाई थी तब जो आज भी कार्यरत है !

आपने सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों के बारे में सुना ही होगा जो संघ के विद्याभारती नमक वाहिनी द्वारा संचालित की जाती है।

तो देश का सबसे पहला सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर में इन्होने ही स्थापित किया था !

ध्यान रहे की आज देश भर में १७ ,३९६ सरस्वती शिशु मंदिर संचालित किये जा रहे है !

इन्होने १९७७ में लोकसभा चुनाव जीता था ,लेकिन १९८० में जब ये ६० साल के हुए तो इन्होने इस्तीफा दे दिया था ताकि नए युवाओ को स्थान मिले !! इतना निस्वार्थ भाव आजकल नामशेष ही हो गया है !

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। अटलजी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया। 2019 में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया गया।

नानाजी देशमुख का सबसे मुख्य कार्यक्षेत्र ग्रामीण भारत का पुनर्गठन ही रहा है ! उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के ५०० से अधिक गावो में सामाजिक पुनर्गठन के अलावा चित्रकूट में दीनदयाल शोध संसथान की स्थापना भी की।

 चूँकि अपने वनवास-काल में राम ने दलित जनों के उत्थान का कार्य यहीं रहकर किया था, अत: इससे प्रेरणा लेकर नानाजी ने चित्रकूट को ही अपने सामाजिक कार्यों का केन्द्र बनाया। उन्होंने सबसे गरीब व्यक्ति की सेवा शुरू की। वे अक्सर कहा करते थे कि उन्हें राजा राम से वनवासी राम अधिक प्रिय लगते हैं अतएव वे अपना बचा हुआ जीवन चित्रकूट में ही बितायेंगे। ये वही स्थान है जहाँ राम ने अपने वनवास के चौदह में से बारह वर्ष गरीबों की सेवा में बिताये थे। उन्होंने अपने अन्तिम क्षण तक इस प्रण का पालन किया।

भारत के पहले ग्रामीण विश्वविद्यालय , “चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय” की नानाजी ने ही स्थापना की थी और वे स्वयं इसके पहले कुलगुरु रहे !

 Nanaji Deshmukh in hindi

इनकी मृत्यु २७ फेब्रुअरी २०१० में हुई !

धन्यवाद्

Writer and Author:

Rudraksha Patle

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Vijaypal Mishra

Spend 20 years of my life observing politics , society in India. Political and social enthusiast. Also trained in Yoga and meditation in Haridwar, Uttarakhand.

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