Terrorist hanged till now in Hindi . आज तक कितने आतंकवादी को मौत की सजा दी गई ।

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अपने देशके न्यायविधान के इतिहास में अबतक सिर्फ 3 आतंकियों को फांसी पे लटकाया गया है। जिसके बारे में नीचे ज़िक्र किया है। अगर हम अबतक के हुए बड़े आतंकी हमलों की बात करे तो दी जानेवाली सजा से बेखौफ होकर कट्टरपंथी आतंकियो ने देश मे घुसकर हमले किये, यही सवाल लाज़मी होता है कि सज़ा देनेमें विलंब व मानवाधिकार की आड़ में आज तक ऐसा होता रहा है के लगता है कि सरकार व कुछ नुमाइंदे आतंकियो की सुरक्षा को ज्यादा तवज्जो देते है।

चलिये शरू करते है देश के कुछ नामी वकीलों द्वारा किये गए हैरतअंगेज तमाशे की शरुआत:

अजमल कसाब का मामला:

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आइए जानते है कि अजमल कसाब पर लगे आरोप दरअसल थे क्या और उन्हें फ़ांसीकी सजा दी क्यो गई?

27 नवंबर 2008 को जब कसाब को पकड़ लिया गया तबसे लेके उसपर गंभीर आरोप लगा दिए गए।

कसाब को 29 दिसंबर 2008 को मेजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और वहां फिरसे अपने गुनाह कबूल कर दिए।

22 फरवरी 2009 को उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील के तौर पर और 1 अप्रैल को अंजलि वाघमारे और उनके बाद अब्बास काज़मी को कसाब के वकील के तौर पर चुन लिया गया।

25 फरवरी 2009 को चार्जशीट दाखिल हुए निचली अदालत में जब कि कसाब ने अपने इकबाल ए बयान में जुर्म कुबूल किया, जसके साथ ही कसाब पर दरअसल सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के अनुसार 312 गुनाह के अंतर्गत आरोप लगाने थे लेकिन अदालत ने कुल 86 प्रावधानों के अंतर्गत गुनाहीत आरोप के सही बताते हुए अपनी कार्यवाही शरू की। 30 नवंबर तक अब्बास काज़मी ने जिरह की व दलीले पेश की बाद में उन्हें हटाकर के पी पवार को कसाब का वकील नियुक्त किया गया। 16 दिसंबर 2009 को सरकारी वकील द्वारा दलीले रखते हुए निचली अदालत को बताया कि ऐसे संगीन अपराध को फांसी की सजा की श्रेणी में लाया जाए और कसाब को सजा दी जाए। केस चला और अदालत में 18 दिसंबर को कसाब ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपो से पल्ला झाड़ दिया और इनकार कर दिया। ये अपनी न्याय पालिका की विडंबना थी के दूसरे देश से आये एक आतंकवादी को भी देशके नागरिक की तरह न्यायपालिका का हिस्सा माना गया और उसपर ठीक उसी तरह सुनवाई की गई जैसे एक आम नागरिक पर की जाती है, शायद उससे थोड़ा ज्यादा ही। अब आता है कहानी में थोड़ा बदलाब, 6 मई 2009 को ट्रायल कोर्ट के फांसी के फैसले को चुनोती देते हुए कसाब ने ऊपरी अदालत में अपील की। मार्च 2010 तक दलीलों का दौर चला और जज एम एल ताहलियानी निचली अदालत के फैसले को बदल दिया। फिरसे 6 मई को कसाब की फांसी को बरकरार रखते हए उन्हें आरोपी माना।

21 मार्च 2011 को कसाब ने अपने ऊपर आये फांसी के फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनोती दी। लेकिन वहां पर भी कसाब को फांसी की सजा बरकरार रही। अब कसाब ने अक्टूबर 2011 को देशकी सर्वोच्च न्यायालय में फंसी के फैसले पर विचार करने के आधार पर ये दलील देते हुए गुहार लगाई के उसको बहलाया गया और मानसिक रूप से उसपर दबाव डाल कर ब्रेनवाश करके ये जुर्म करवाया गया। और जनवरी 2012 के अंत तक कसाब ने अपने पर लगे आरोपो के बारे जवाब देते हुए कहा उसको मुक्त व न्यायिक तरीके से न्यायालय में पेश नही किया जा रहा।

16 अक्टूबर 2012 आते आते सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी के उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा और कसाब ने गृह मंत्रालय को दया याचिका सौंप दी और गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को दी और 5 नवंबर 2012 को राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज की। 8 नवंबर को महाराष्ट्र सरकार को इसकी जानकारी दी गई और तय समय पर 21 नवंबर 2012 को कसाब को पुणे की यरवडाजेल में फंसी दे दी गई।

अब सोचिये, 2008 के अंत मे कोई बाहरी देश का नागरिक अपने देश मे आकर देशकी आर्थिक राजधानी मुम्बई की कई मशहूर जगह पर गोलियां बरसाते रंगे हाथ पकड़ा गया हो और फांसी की सजा देने में अपनी ही न्यायप्रणाली के अंतर्गत 4 साल लग गए फांसी देने को ये एक सोचने वाली बात है। पोलिस व प्रशाशन पर आरोप लगे कि कसाब के ऊपर अधिक खर्च किया गया। लेकिन अंत मे न्याय की जीत हुई ये मानकर देशवासी खुश हुए।

याकूब मेमन का मामला:

और अब बात करते है याक़ूब मेमन की, देश के कुछ बड़े नामी लोगोने न्यायपालिका और देशकी भावनाओका तमाशा बनाकर रख दिया।

याकूब मेमन, पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़े भाई टाइगर मेमन के हवाले व दाऊद इब्राहिम के हिसाब किताब रखने वाला सक्ष। तो चलिए जानते है कि फांसी आखिर दी क्यो गई?

12 मार्च 1993 को मुंबई की एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर बम्ब ब्लास्ट किये गए। जिसमे सरकारी रेकार्ड के अनुसार 257 जाने गई और 713 लोग जख्मी हुए। अप्रैल 1993 में मशहूर फिल्म अभिनेता संजय दत्त को बम ब्लास्ट में शामिल होने के जुर्म में TADA के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। 4 नावम्बर 1993 को मुंबई पुलिस ने 10000 पन्नो की चार्जशीट दाखिल की और 189 लोगो को आरोपी बताया जिनमे 117वे थे संजय दत्त। नवंबर के अंत तक देशकी CBI को ये केस सौंप दिया गया। 1994 की 10 अप्रैल को 26 लोगो को TADA की अदालत ने बरी कर दिया जिसमे से एक थे अबु आज़मी जी अब समाजवादी पार्टी के सांसद है।

2006 आते आते डी कंपनी के एक सदस्य अबु सालेम पर अलग मिकदमा चलाया गया। सितंबर 2006 में कोर्ट ने मेमन परिवार के 4 सदस्य को आरोपी माना और 3 सदस्य को बरी भी किया। 12 आरोपियो को फांसी व 20 आरोपियो को आजीवन जेल की सजा सुनाई गयी।

नवंबर 2011 को तकरीबन 100 अरोपियोने देश की सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। जिनमे से एक था याकूब मेमन। 2013 भी आ गया और याकूब मेमन की फांसी की सजा को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा। जुलाई महीने की 30 तारीख को याकूब मेमन द्वारा सबसे पहले दया याचिका दायर की गई जबकी न्यायालय ने पहले से ही 14 अगस्त को याकूब मेमन के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था। 11 अप्रैल 2014 को देशके तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका को खारिज कर दिया। अब पैच फसा था याकूब मेमन की केस को लेकर फिरसे जांच किये जाने वाली याचिका पर, देश की सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल 2015 को उसे भी खारिज कर दिया।फांसी को टालने के लिए जब 2015 के जुलाई महीने में क्यूरेटिव याचिका भी दायर कर दी गई। अब यहां से शरू हुआ तमाशे का सिलसिला, देश के काफी नामी गिरामी लोग याकूब मेमन की फांसी को रोकने के संदर्भ में सामने आए। 2 जज की एक बेंच को देश के चीफ जस्टिस की अगुवाई में गठन किया गया। जो देर रात तक इस पेंच को सुलझाने की मशक्कत करते रहे। आखिरकार 29 जुलाई 2015 को याचिका खारिज कर दी गई और मेमन की फांसी को सही माना गया। 30 जुलाई को मेमन को फांसी दे दी गए।

अब देखे इस घटनाक्रम को, एक भारतीय नागरिक जो एक संगीन अपराध का आरोपी हो, आरोप पर खुद कबूलनामा दे चुका हो और वह भी एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू पर, जो उस अपराध के मास्टर माइंड का भाई है, एकलौता आरोपी जिसे सजाएमौत मिली उस केस में, आरोपी को जितनी सुविधा दे सकती थी सरकार उसे के ज्यादा मिली फिरभी लोग उसके पक्ष में सामने आते है और कहते है कि सजा ए मौत क्यो हो। तकरीबन 300 लोग ऐसे रहे जिनकी वजह से आधी रातको अदालत बैठानी पड़ी। गौर करनेवाली बात ये है कि यही न्यायप्रणाली क्यो आप और मेरे जैसे लोगो के लिए नही बानी। इस मुद्दे को धार्मिक रूप से भी जोड़ दिया गया और कहा गया कि मोदी सरकार मुस्लिम विरोधी है जसलिये जल्दबाज़ी कर रही है, कोई इन्हें बताए कि साहब 22 साल जल्दबाज़ी नही होती जनाब। इसके परिवार को अंतिम क्रिया के लिए नागपुर में शब दिया गया और इसमें भी तमाशा करने कुछ नामी लोग जनाज़े पर पहुच गए। देश की सबसे बड़ी अदालत को रात में मीडिया व कुछ नामी लोगोने मुजरा केरने वाला ठेका समज लिया और देर रात तक न्यायपालिका का नंगानाच चलता रहा। इनमे से कुछ विरोधी दल के लोग इस वजह से नाराज़ थे कि ये सजा मोदी सरकार के कार्यकाल में क्यो सुनाए है?

अफ़ज़ल गुरु का मामला:

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ठीक ऐसा ही अफ़ज़ल गुरु के मामले में भी हुआ। कुछ लोग आज भी अफ़ज़ल गुरु को भगवान समज रहे है। क्या करे सोच सोच का सवाल है।

अफ़ज़ल गुरु बारामुला का रहनेवाला था जो पड़ता है जम्मू कश्मीर में। उसने सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी डॉक्टरी की पढ़ाई शरू की। पहले साल के दौरान वह जैश ए मोहम्मद की कुछ ऐसी गतिविधियों में आया जिसका खामयाजा उसको व देश को भुगताना पड़ा।

फांसी तक कि अफजल गुरू की रूप रेखा:

  • 13 दिसम्बर 2001: पांच चरमपंथियों ने संसद पर हमला किया। हमले में पांच चरमपंथियों के अलावा सात पुलिसकर्मी सहित नौ लोगों की मौत हुई।
  • 15 दिसम्बर 2001: दिल्ली पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथी अफज़ल गुरु को गिरफ़्तार किया। उनके साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसएआर गिलानी को भी गिरफ़्तार किया गया। 
    इन दोनों के अलावा अफ़शान गुरु और शौकत हसन गुरु को गिरफ़्तार किया गया।
  • 29 दिसम्बर 2001: अफज़ल गुरु को दस दिनों के पुलिस रिमांड पर भेजा गया।
  • 4 जून 2002: अफज़ल गुरु, एएसआर गिलानी, अफ़शान गुरु और शौकत हसन गुरु के ख़िलाफ़ मामले तय किए गए।
  • 18 दिसम्बर 2002: अफज़ल गुरु, एएसआर गिलानी औऱ शौकत हसन गुरु को फाँसी की सजा दी गई। अफ़शान गुरु को रिहा किया गया।
  • 30 अगस्त 2003: जैश-ए- मोहम्मद के चरमपंथी गाजी बाबा, जो संसद पर हमले का मुख्य अभियुक्त को सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने दस घंटे तक चले इनकाउंटर में श्रीनगर में मार गिराया।
  • 29 अक्टूबर 2003: मामले में एएसआर गिलानी बरी किए गए।
  • 4 अगस्त 2005: सुप्रीम कोर्ट ने अफज़ल गुरु की फाँसी की सजा बरकरार रखा। शौकत हसन गुरु की फाँसी की सजा को 10 साल कड़ी कैद की सज़ा में तब्दील किया गया।
  • 26 सितंबर 2006: दिल्ली हाईकोर्ट ने अफज़ल गुरु को फाँसी देने का आदेश दिया।
  • 3 अक्टूबर 2006: अफज़ल गुरु की पत्नी तबस्सुम गुरु ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सामने दया याचिक दायर की।
  • 12 जनवरी 2007: सुप्रीम कोर्ट ने अफज़ल गुरु की दया याचिका को खारिज़ किया।
  • 16 नवम्बर 2012: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफज़ल गुरु की दया याचिका गृह मंत्रालय को लौटाई।
  • 30 दिसम्बर 2012: शौकत हसन गुरु को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया।
  • 10 दिसम्बर 2012: केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि अफज़ल गुरु के मामले की पड़ताल करेंगे।
  • 13 दिसम्बर 2012: भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में प्रश्न काल के दौरान अफज़ल गुरु को फाँसी दिए जाने का मुद्दा उठाया।
  • 23 जनवरी 2013: राष्ट्रपति ने अफज़ल गुरु की दया याचिका खारिज की गई।
  • 03 फ़रवरी 2013: गृह मंत्रालय को राष्ट्रपति द्वारा खारिज याचिका मिली।
  • 09 फ़रवरी 2013: अफज़ल गुरु को नई दिल्ली को तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे फाँसी पर लटकाया गया।

मेंरा उत्तर पढ़ने के लिए धन्यवाद।

अगर उत्तरमे त्रुटि नज़र आये तो सुझाव जरूर दे। हालांकि मैने इसे लिखते समय इसका घटनाक्रम काफी ध्यान से लिखा है।

Writer and Author:

©Bhavin Pathak

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Vijaypal Mishra

Spend 20 years of my life observing politics , society in India. Political and social enthusiast. Also trained in Yoga and meditation in Haridwar, Uttarakhand.

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